दान और यज्ञ शुभ कर्म, जबकि भागवत कराना सत्कर्म : आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी
रिपोर्ट आरिफ कुरैशी
रामगढ़। रुंगटा परिवार, रामगढ़ के सानिध्य में रामगढ़ जिमखाना क्लब रिसोर्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मुख्य यजमान श्रीमती माया रूंगटा, धर्मपत्नी स्वर्गीय रामचंद्र रूंगटा, उनके पुत्र अभिषेक, आलोक एवं आशीष रूंगटा ने सपत्नीक एवं बाल-बच्चों के साथ व्यासपीठ का पूजन किया। इस अवसर पर परम श्रद्धेय आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज का चंदन-वंदन एवं माल्यार्पण कर स्वागत-अभिनंदन किया गया।
कथा के दौरान रांची से पहुंचे स्वर्गीय रामचंद्र रूंगटा के बड़े भाई रामस्वरूप रूंगटा, दीपक रूंगटा एवं सुशील रूंगटा ने आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। आचार्य श्री ने उन्हें अंगवस्त्र प्रदान कर आशीर्वाद दिया। बांके बिहारी जी की आरती के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने वृंदावन के निधिवन की चर्चा करते हुए राधा-कृष्ण के स्वरूप एवं बांके बिहारी जी की महिमा का वर्णन किया। आचार्य ने कहा कि वृंदावन की भूमि भोग की भूमि नहीं, बल्कि भगवान की भूमि है। यहां भोग नहीं, भगवान स्वयं विराजमान हैं। स्वर्ग में पुण्य का फल मिलता है, जबकि वृंदावन में प्रेम का फल मिलता है। उन्होंने कहा कि वृंदावन में आज भी भक्ति नृत्य करती है। यदि कोई वृंदावन वास एवं भागवत प्राप्ति की इच्छा से वहां जाए तो उसे स्वयं को गुप्त रखते हुए ठाकुर जी की भक्ति करनी चाहिए।
उन्होंने नारद जी के प्रसंग के साथ भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चतुराई को त्यागकर मन, वचन और कर्म से भगवान का भजन करने से परमात्मा की प्राप्ति संभव है। जो भक्ति करता है, वही प्रेम का वास्तविक बोध प्राप्त करता है। भागवत की महिमा बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि दान और यज्ञ करना शुभ कर्म है, जबकि श्रीमद्भागवत का आयोजन एवं श्रवण सत्कर्म है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भागवत कथा के लिए समय निकालने और भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कथा के मध्य आचार्य श्री द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा’ तथा ‘राधे-राधे बोलो, चले आएंगे बिहारी’ पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने और नृत्य करने लगे। कथा स्थल राधे-राधे के जयघोष से गूंज उठा। कथा के बीच आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसका श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। व्यासपीठ पर सुरेश अग्रवाल, कमल बगड़िया, अजय बजाज एवं अनिल अग्रवाल सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के मुख्य यजमान आलोक रूंगटा ने शहर की सभी धार्मिक, सामाजिक एवं व्यापारिक संस्थाओं के सदस्यों से प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित कथा में सपरिवार एवं इष्ट-मित्रों के साथ शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा प्रांगण में 15 मिनट पूर्व अपना स्थान ग्रहण करने की अपील की। भागवत भगवान की आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
